शनिवार, 17 जुलाई 2010

अपना कोई रूप ना रहा.........

अपना कोई रूप ना रहा
इतने सांचों में मैं ढला

गुम था इक भीड़ में मगर
वो मुझे तनहा सा लगा

खुद को महसूस कर लूं मैं
मेरे बाजुओं में

आरजू ना साहिलों की कर
साथ लहरों का तू निभा

हौसला था पंखों का फ़क़त
पंछी जब शाख से उड़ा

2 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

आरजू ना साहिलों की कर
साथ लहरों का तू निभा
खुबसूरत शेर दिल की गहराई से लिखा गया मुवारक हो

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति